Statue Of Equality : 216 फिट ऊँची स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी की क्या है खासियत? पीएम मोदी ने किया अनावरण..

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Statue Of Equality :  हैदराबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी” यानी रामानुजाचार्य की प्रतिमा का अनावरण किया। पीएम मोदी ने शमशाबाद में 11 वीं सदी के रामानुजाचार्य की 216 फीट ऊंची स्मृति का लोकार्पण किया। इस दौरान पीएम मोदी ने यज्ञशाला में पूजा-अर्चना भी की। यह पूरी दुनिया में बैठी अवस्था के दौरान सबसे ऊंची धातु की प्रतिमाओं में से है। जो लगभग 54 फुट ऊंचे भवन पर स्थापित की गई है।

Statue Of Equality:  Statue Of Equality

ये है खासियत :
संत रामानुजाचार्य की प्रतिमा पंच धातु से बनाई गई है। जिसमें सोना, चांदी, पीतल, जस्ता और तांबा शामिल है। इस स्मृति का निर्माण लगभग 34 एकड़ में हुआ है। यहां मुख्य यज्ञशाला के साथ ही 144 यज्ञशालें बनाई गई हैं साथ ही यहां की हर चारों दिशाओं में 36 मंदिर हैं। संतराम रामानुजाचार्य की इस मूर्ति के आसपास हर देश के झंडे लगाए जाएंगे जो समानता का प्रतीक होंगे।

स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी क्यों : Statue Of Equality
Statue Of Equality : दरअसल संत रामानुजाचार्य समाज के हर लोगों में समानता का विचार रखते थे और उन्होंने समाज समाज से हर भेदभाव को हटाते हुए सभी के लिए मंदिर के द्वार खोलने का प्रयत्न किया था। आपको बता दें वो समय ऐसा था जब कई जाति के लोगों को मंदिर में नहीं आने दिया जाता था और उन्हें शिक्षा का भी अधिकार नहीं था। ऐसे में रामानुजाचार्य ने समाज में समानता का संदेश दिया था। जिस कारण ही आज उनकी प्रतिमा का नाम “स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी” रखा गया है।

कौन थे रामानुजाचार्य : Statue Of Equality
Statue Of Equality : 11 वीं सदी के संत रामानुजाचार्य तमिलनाडु में जन्मे थे। जो एक समाज सुधारक के रूप में प्रसिद्ध हुए। उन्होंने पूरे देश में समाज को समानता का संदेश दिया था। उन्हें रामदास कबीर जैसे कवियों के लिए प्रेरणा भी कहा जाता है।

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