Uttarakhand Lost And Found : जानिए 21 सालों में उत्तराखंड ने क्या खोया और क्या पाया

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Uttarakhand Lost And Found : उत्तराखंड राज्य अब जवानी की दहलीज पर आ चुका है। राज्य को बने हुए 21 साल पूरे हो चुके हैं। आज पूरे प्रदेश में 22वां स्थापना दिवस मनाया रहा है। उत्तराखंड को 2000 की 9 नवंबर को अलग राज्य का दर्जा मिला था। उत्तर प्रदेश से अलग होने के लिए उत्तराखंड में कई साल आंदोलन चला रहा। इस दौरान पुलिस की गोली से 42 राज्य आंदोलनकारी भी शहीद हुए थे। कहते हैं उत्तराखंड के हर दूसरे घर में एक सेना का जवान होता है। सैनिकों की भूमि कहे जाने वाले इस राज्य ने देश की सरहद पर कई आहुतियां दी हैं। वहीं उत्तराखंड में अब तक जो भी विकास हुआ है। वो इस बात का प्रमाण है कि अब पहाड़ का पानी और जवानी दोनों यहां के काम आ रहे हैं। प्रदेश में मौजूदा भाजपा सरकार के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से प्रदेश के युवाओं और जनता को बहुत उम्मीदें हैं।

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प्रदेश ने क्या खोया :

Uttarakhand Lost And Found : जब उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड राज्य बना तो विरासत में प्रदेशवासियां को कर्ज मिला। बता दें उस समय उत्तराखंड के हिस्से में ढाई हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज आया था। जो इन 21 सालों में 55 हजार करोड़ तक पहुंच चुका है। प्रदेश को एक बड़ा झटका साल 2013 में लगा। जब केदारनाथ में आई भीषण आपदा से प्रदेश को बड़ी क्षति हुई। उस दौरान कांग्रेस की सरकार को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा। इन 21 सालों में राज्य ने राजनीतिक अस्थिरता और दलबदल के क्षेत्र में खूब नाम कमाया। राज्य में अस्थिर सरकार की शुरुआत करने वाली भाजपा ही है। लेकिन आज भी मुख्यमंत्री के कार्यकाल पूरा होने पर सवालिया निशान बना रहता है।

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Uttarakhand Lost And Found : साल 2017 में सरकार में 2 मंत्रियों समेत 9 विधायकों ने विधानसभा के भीतर ही दलबदल कर आजाद भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट को विधानसभा की कार्यशैली में हस्तक्षेप करना पड़ा था। वहीं राज्य में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। हालाकिं कोरोना के बाद प्रदेश के कई युवाओं ने घर वापस आकर स्वरोजगाार अपनाया है। लेकिन पहाड़ की असुविधाओं व आपदा के दंश के कारण बेरोजगाारी बढ़ती जा रही है।पलायन पहाड़ी इलाकों में एक बड़ा नासूर बन चुका है। अब सरकारों के लिए भी ये एक चुनौती से कम नहीं है। हालांकि सभी सरकारों द्वारा कई प्रयास किये गए हैं। लेकिन हालात ऐसे हैं कि कई गांव अब घोस्ट विलेज बन चुके हैं। प्रदेश में जनता ही नहीं नेता भी शहरों में पलायन कर चुके हैं। राज्य गठन के 21 साल बाद भी उत्तराखंड को स्थायी राजधानी नहीं मिल सकी। देहरादून आज भी अस्थायी राजधानी है और गैरसैंण को भाजपा सरकार के कार्यकाल में ग्रीष्मकालीन राजधानी बन पाई है।

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राज्य ने क्या पाया :

Uttarakhand Lost And Found : उत्तराखंड में इन 21 सालों में जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर विकास हुआ। उत्तराखंड ऊर्जा प्रदेश बनकर उभरा है। राज्य में सबसे बड़ी टिहरी जल विद्युत परियोजना का काम 2005 में शुरू हुआ था।वहीं आज प्रदेश में छोटी से लेकर बड़ी सैकड़ों जल विद्युत परियोजनाएं काम कर रही हैं। राजनीति की बात करें तो एन डी तिवारी की सरकार को प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए याद किया जाता है। प्रदेश में ऑल वेदर रोड से जिंदगी आसान हुई है। राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ-साथ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना भी एक बड़ी उपलब्धि है। राज्य बनने के बाद 90 फीसदी ग्रामीण इलाकों को सड़कों से जोड़ने का काम हुआ है।

Uttarakhand Lost And Found :

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Uttarakhand Lost And Found : इसके अलावा पहाड़ पर रेल एक सपना केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार ने पूरा किया है। ऋषिकेश से कर्णप्रयाग रेलवे प्रोजेक्ट को प्रदेश की एक बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है। इसके अलावा एयर कनेक्टिविटी को लेकर भी सरकार ने सराहनीय काम किये हैं। वहीं चारधाम में करोड़ों की योजनाओं से पहाड़ कि गोद का विकास हो रहा है। अब प्रदेश के युवा पहाड़ों में आर्गेनिक खेती के साथ ही स्वारोजगार को भी अपना रहे हैं। आज के उत्तराखण्ड़ की बात करें तो हर क्षेत्र में राज्य के युवा अपना परचम लहरा रहे हैं। चाहे वो सेना औद्योगिक और शिक्षा हो या सिनेमा संगीत या ​कला हर क्षेत्र में आज उत्तराखंड के युवा राज्य को सम्मान और गर्व के साथ आगे बढ़ा रहे ​हैं।

 

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