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आपदा के बीच सिर्फ 15 मिनट! सचिव की ‘व्यस्तता’ पर उठे सवाल

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आपदा के बीच सिर्फ 15 मिनट! सचिव की ‘व्यस्तता’ पर उठे सवाल

उत्तराखंड में मौसम बिगड़ा हुआ है… कई जिलों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन अलर्ट मोड पर होने का दावा कर रहा है… लेकिन इसी बीच आपदा प्रबंधन विभाग से सामने आई एक सूचना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन आज सचिवालय में सुबह 11 बजे से 11 बजकर 15 मिनट के बीच उपलब्ध रहेंगे।

सवाल ये है कि जब प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और आपदा का खतरा बना हुआ है, जब मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ तक प्रशासन को लगातार निगरानी की जरूरत है… ऐसे समय में आपदा प्रबंधन के जिम्मेदार सचिव की उपलब्धता महज 15 मिनट तक सीमित क्यों है?

क्या आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विभाग के लिए 15 मिनट का समय पर्याप्त है?

बारिश के बीच अगर किसी जिले से अचानक बड़ा इनपुट आता है… अगर किसी सड़क के बंद होने, नदी-नाले के उफान या गांवों के संपर्क से कटने की सूचना आती है… तो क्या इतनी सीमित उपलब्धता में त्वरित फैसले लिए जा सकेंगे?

वहीं दूसरी ओर, सरकार लगातार दावा करती रही है कि आपदा को लेकर पूरा सिस्टम अलर्ट है।

लेकिन सवाल यही है—सिस्टम अलर्ट है तो जिम्मेदार अधिकारी कितने समय के लिए उपलब्ध हैं?

प्रदेश इस वक्त मौसम की चुनौती से जूझ रहा है और ऐसे में आपदा प्रबंधन विभाग की सक्रियता सबसे ज्यादा जरूरी है।

सवाल बड़ा है—आपदा के समय 24 घंटे की मुस्तैदी चाहिए या सिर्फ 15 मिनट की उपलब्धता?

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