Newsउत्तराखंडराजनीति

Banarasi Pan : लंगड़ा आम और बनारसी पान को G टेग, 444 उत्पादों को मिल चुका है जी टेग

Uk Tak News

Banarasi Pan : उत्तर प्रदेश के बनारसी पान और लंगड़ा आम को जी आई टेग मिल गया है। इससे पहले यूपी के महोबा के पान को भी जीआई टेग मिला है। जीआई टेग में एक प्रक्रिया के बाद किसी वस्तु विशेष को पहचान मिलती है कि वह कहां पैदा होती है या कहां बनाया जाता है। इसके कई फायदे होते हैं। अब यूपी के लंगड़ा आम और बनारसी पान जीआई टेग मिल गया है। भारत सरकार के जियोग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री कार्यालय ने लंगड़ा आम और बनारसी पान को जी आईटेग देने का निर्णय किया है, इससे पहले यूपी के ही महोबा के पान को जी आई टेग मिला था।

Banarasi Pan :

जीआई टेग में किसी क्षेत्र विशेष के उत्पाद को मान्यता मिलती है। इसमें उस क्षेत्र में उस वस्तु की कुछ खासियत को देखा जाता है। जैसे बनारसी पान की अपनी विशेषता है। खासकर बनारसी पान का जो बीड़ा बनाया जाता है उसकी अपनी अलग पहचान है। बनारसी पान पर फिल्म में गीत भी बने हैं। किशोर कुमार की आवाज में खइके पान बनारसी वाला गीत बहुत चर्चित हुआ था। बनारसी पान को लोग बहुत चाव से खाते हैं। इसी तरह लंगड़ा आम की मिठास लोगों को भाती है। लंगडा आम को किसान अपने व्यापारिक फायदे के लिए भी बहुत पसंद करते हैं। यूपी में लंगडा आम से जुड़ी एक सन्यासी की कहानी भी बड़े रुझान से सुनाई जाती है। अब बनारसी पान और लंगड़ा आम दोनों जी टेग से जुड़ गए हैं।

संसद में 1999 में रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन एक्ट के तहत जियोग्राफिकल इंडिकेशन आफ गुड्स लागू किया गया था। इस आधार पर ही भारत में किसी भी क्षेत्र में पाए जाने वाली विशेष वस्तु का कानूनी अधिकार उस राज्य को दिया जाता है। ये टेग किसी खास भौगोलिक परिस्थिति में मिलने वाले का उत्पाद का दूसरे स्थान पर गैरकानूनी इस्तेमाल को रोकता है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले रस्सगुल्ला को लेकर पश्चिम बंगाल और उड़ीसा राज्य के बीच इस बात को लेकर विवाद हुआ था कि वास्तव में किस राज्य में रसगुल्ला उसकी पहचान है।

Banarasi Pan :

इस बार भारत की जियोग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री कार्यालय ने जिन 33 चीजों को जी टेग की मान्यता दी है उनमें ज्यादातर चीजें यूपी से हैं। जी आईटेग में किसी क्षेत्र विशेष के उत्पाद को मान्य़ता इसके किसी क्षेत्र से प्रमाणित किया जाता है। जी टेग के लिए व्यक्तिगत स्तर पर या संगठन स्तर पर कंट्रोलर जनरल पेटेंट डिजाइन एंड ट्रेडिशन में आवेदन किया जा सकता है। इसके बाद संस्था की तरफ से उसे पऱखा जाता है। उस चीज की जांच पड़ताल होती है। शुरु में यह दस साल के लिए दिया जाता है। लेकिन इसे रिन्यू भी किया जा सकता है। जीआई टेग को ससंद से मान्यता मिली है। किसी चीज को जी आईटेग मिलने के कई फायदे होते हैं। इसमें उत्पाद को कानूनी संरक्षण मिलता है। जी टेग मिलना गुणवता का पैमाना है। इसका व्यापार पर खासा असर होता है। खासकर विदेशों में उसकी एक पहचान बनती है। उस क्षेत्र की अपनी पहचान बनती है। इससे रोजगार भी बढता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *